upbhulekh.gov.in उत्तर प्रदेश भूलेख पोर्टल 2022 | ऑनलाइन खसरा, खतौनी, भू-नक्शा देखें

उत्तर प्रदेश भूलेख : आज के समय में अधिकतर सारे सरकारी काम ऑनलाइन के माध्यम से किए जा रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा फायदा लोगों को मिला है क्योंकि आज के समय में लोगों को अपना काम करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के आगे बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते। जबकि पहले के समय में लोग अपना काम कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के आगे चक्कर लगाते लगाते परेशान हो जाते थे और लोगों का कुछ समय का काम करने के लिए सरकारी अधिकारी महीनों का समय लगा देते थे।

लोग अपना काम जल्दी करवाने के लिए सरकारी अधिकारियों को घूस भी दे देते थे,  पर आज के समय में ऐसा कुछ भी नहीं होता और घूसखोरी के मामले भी बिल्कुल खत्म हो चुके हैं। लोग अपना काम ऑनलाइन के माध्यम से कर लेते है। ऑनलाइन के माध्यम से अपनी जमीन से जुड़े कार्यों को अपने घर बैठे ही कर लेते हैं। जमीन की खसरा- खतौनी या नक्शा निकलवाने के लिए कचहरी- तहसील आदि दफ्तरों के बार-बार आगे पीछे घूमने की जरूरत नहीं पड़ती। आप इन कामों को अपने कंप्यूटर या मोबाइल से अपने घर बैठे ऑनलाइन के माध्यम से कर सकते हैं। 

अपनी जमीन से जुड़े कामों के लिए लोग ज्यादातर कचहरी या तहसील के चक्कर लगाया करते है। नक्शा या खसरा- खतौनी का काम कराने के लिए लोग अधिकारियों के सामने मिन्नतें किया करते है। लेकिन इसके बावजूद अधिकारी काम करते-करते महीनों का समय लगा दिया करते है।  पर आज के समय में लोग तहसील या लेखपाल के पास नहीं जाकर भी अपना काम कर सकते हैं। पहला रास्ता यह है कि आप जन सेवा केंद्र में जाकर अपनी जमीन से जुड़े कार्यों को आसानी से करवा सकते हैं। दूसरा रास्ता क्या है कि आप अपने घर में बैठकर अपने मोबाइल या लैपटॉप में इंटरनेट के माध्यम से अपनी जमीन से जुड़े कार्य को कर सकते हैं। 

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भूलेख

भूलेख दो हिंदी शब्दों से मिलकर बना है भू (भूमि) और लेख (खाता) इन दो शब्दों से मिलकर भूलेख बना है।  यह अंग्रेजी शब्द (Land Record) के समान है।  इसे कई स्थानों पर कई नामों से जाना जाता है जैसे कि खेत के कागजात, भूमि अभिलेख, खेत का नक्शा, जमाबंदी, खाता आदि। 

भारत के राज्यों ने अपनी ऑनलाइन जमीन रिकॉर्ड पोर्टिलो को रखने के लिए भूलेख का नाम दिया है। इसके चलते आप अपनी भूमि या जमीन का मालिकाना हक पा सकते हैं क्योंकि इसमें जमीन के बारे में अच्छी तरीके से जानकारी मिल जाती है। आप अपनी जमीन के चलते किसी भी बैंक में जाकर लोन ले सकते हैं और आप फसल का बीमा भी ले सकते हैं। जमीन के बंटवारे के समय जमीन के कागज बहुत ही काम आते हैं।

UP भूलेख क्या है

 

उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने जमीन के अभिलेखों के लिए डिजिटल पोर्टल जैसे उत्तर प्रदेश भूलेख की शुरुआत की है। राष्ट्रीय जमीन अभिलेख के कामों को करने के लिए भारत सरकार ने सभी जमीन अभिलेखों को डिजिटल कर गया दिया है। उत्तर प्रदेश भूलेख का मतलब जमीनों का सारा हिसाब-किताब और रिकॉर्ड रखना है। 

UP Bhulekh Portal 2022

आप कोई भी नई जमीन खरीद रहे हो तो आपको उस जमीन के संबंधित सारी बातें पता होनी चाहिए ताकि आपको आगे चलकर किसी भी प्रकार की समस्या या परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के द्वारा एक शुरुआत की गई जिसमें जमीन के रिकॉर्ड के लिए डिजिटल पोर्टल है। भूलेख की शुरुआत से पहले जमीन से जुड़े सभी काम जैसे- खतौली प्रणाली, जमाबंदी आदि कामों को कागजों के रूप में रिकॉर्ड किया जाता था। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन से जुड़े सारे रिकॉर्ड को डिजिटल कर दिया है। इसमें जमीन के हिसाब किताब और रिकॉर्ड को रखने में मदद मिलती है।  इसमें जमीन के मालिक कि सारी जानकारी विस्तार रूप से शामिल है। इसे उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में लागू कर दिया गया है। https://upbhulekh.gov.in/ 

अपने जमीन के रिकॉर्ड को ऑनलाइन कैसे देखें। 

उत्तर प्रदेश पोर्टल के जरिए जमीन का पूरा दौरा देखकर आप जमीन का मालिकाना हक पा सकते हैं।  इस पोर्टल के माध्यम से आपको अपनी जमीन से संबंधित सारी जानकारी मिल जाती है। आप इनकी वेबसाइट पर जाएं इसके लिए आपको भूलेख उत्तर प्रदेश आधिकारिक पोर्टल upbhulekh.gov.in पर जाना होगा।  इस वेबसाइट पर जाकर आपको अपनी जमीन से जुड़ी सभी संबंधित जानकारी प्राप्त हो जाएगी। 

UP Bhulekh Map 2022

 

उत्तर प्रदेश सरकार ने भू-नक्शा पोर्टल वेबसाइट ये ध्यान में रख कर बनाया है की किसी को भी परेशानी ना हो और वो अपने मोबाइल या लैपटॉप से भू-नक्शा, खतौनी देख सकते हैं । लोग बड़ी ही आसानी से भू-नक्शा या सजरा रिपोर्ट प्रिंट करा सकते हैं। पोर्टल में लोगों की समस्या को काफी हद तक ठीक कर दिया है। 

 

ऐसी कई घटनाओं को कम करने में बड़ी ही सहायता मिली है। यदि आपके साथ कोई भी ऐसी समस्या है कि यदि आपका पड़ोसी किसी भी जमीन में वह आपसे कहता है कि यह मेरी जमीन है और आपके पास उस जमीन के चलते कोई भी सबूत नहीं है। फिर आपके पास एक ही विकल्प रह जाता है वह है कचहरी, तहसील के चक्कर लगाते रहना और इसके अलावा आपके पास कोई भी अलग विकल्प नहीं होता है। 

उत्तर प्रदेश भू-नक्शा कैसे देखें।

 

यूपी सरकार ने लोगों के लिए ऑनलाइन भू-नक्शा की शुरुआत कर दी है।  लोग अपनी जमीन, खेत, प्लॉट का नक्शा अब ऑनलाइन घर बैठकर अपने लैपटॉप या कंप्यूटर या मोबाइल पर देख सकते हैं। आप उत्तर प्रदेश के निवासी है और आपने कभी अपने घर का नक्शा नहीं देखा है। तो हम आपको बताएंगे कि UP भू-नक्शा कैसे देखा जाता है? इसे आप अपने मोबाइल पर ऑनलाइन कैसे देख सकते हैं? 

राजस्व ग्राम खतौनी का कोड कैसे जानें

  1. उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग ने सुविधानुसार सभी गांवों में एक खतौनी का कोड विभाजित किया है। आपको अपने गांव का खतौनी कोड जानने के लिए सरकारी वेबसाइट upbhulekh.gov.in पर जाना होगा।
  2. गांव का खतौनी कोड जानने के लिए संबंधित जिला तहसील और गांव का चयन करना होगा।
  3. गांव के नाम के साथ गांव का खतौनी कोड पोर्टल पर दर्ज किया गया है।
  4. आप उसे लिख सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार उस कोड का प्रयोग जरूरत के समय पर कर सकते हैं। 

भूखंड/गाटे के वाद ग्रस्त होने की स्थिति कैसे जाने

  • सबसे पहले आपको सरकारी वेबसाइट upbhulekh.gov.in को खोलना पड़ेगा।
  • आपके सामने वेबसाइट का होम पेज खुल जाएगा आपको होम पेज में “भूखंड/ गाटे के वाद ग्रस्त होने की स्थिति जाने” बटन पर क्लिक करना होगा।
  • आपके सामने एक पेज खुल जाएगा इसमें आपको अपना जनपद चुनना होगा।
  • आपको अपनी तहसील सेलेक्ट करनी होगी।
  • अपना गांव सेलेक्ट करना होगा।
  • गांव चुनने के बाद आपके सामने एक पेज खुल जाएगा जिसमें आपको अपनी खसरा या गाटा संख्या लिखना होगा और खोजे पर क्लिक करना होगा।
  • जैसे ही आप खसरा नंबर एंटर करते हैं तो आपके सामने जमीन का मालिक का नाम, भूखंड जूली कोड के साथ आपकी स्क्रीन पर दिखाई देगा।
  • आप अपना यूनिक कोड सिलेक्ट कर ले और गाटा प्रस्थिति पर क्लिक कर ले और यदि कोई गड़बड़ी होगी तो उसका सारा विवरण और उसकी स्थिति की जानकारी मिल जाएगी।
  • ऐसे ही आपको अपने भूखंड/ गाटे के वाद ग्रस्त होने की स्थिति मिल जाएगी। 

भूलेख पोर्टल का उद्देश्य

 

  1. उत्तर प्रदेश भूलेख पोर्टल पर जानकारी अन्य तरीके से मिल जाती है। जमीन के स्वामित्व विवरण का प्रयोग करके विक्रेता को सत्यापित कर सकते हैं। जो जमीन से जुड़े गड़बड़ी या धोखाधड़ी की बहुत कम गुंजाइश छोड़ता है।
  2. जमीन के मालिक किसी भी तरीके की जमीन में हेराफेरी नहीं कर सकता। क्योंकि उत्तर प्रदेश भूलेख पोर्टल जमीन से जुड़े किसी भी प्रकार की कैसी भी जानकारी आपको भूलेख पोर्टल के अंदर मिल जाती है। 

UP भू-लेख के लाभ

 

उत्तर प्रदेश भूलेख के चलते उत्तर प्रदेश में किसी भी जमीन के रिकॉर्ड, उससे संबंधित कैसी भी गतिविधियों को कंप्यूटराइज कर दिया गया है। उसी से जुड़े कुछ लाभ निम्न हैं – 

 

  • उत्तर प्रदेश भूलेख का प्रयोग जमीन से जुड़ी सभी जानकारी को रखने के लिए किया जाता है।
  • गेट नंबर या खसरा नंबर सभी प्रकार के विवरण प्रदान करने में सहायता करता है।
  • आप पोर्टल का प्रयोग कर के सरकारी सेवाओं का लाभ उठाकर अपना समय बता सकते हैं।
  • उत्तर प्रदेश भूलेख लोगों के काम को कम करने में सहायता करता है क्योंकि लोगों को अब राजस्व विभाग के दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • सभी सुविधाएं ऑनलाइन होने के कारण लोगों को सरकारी दफ्तरों के आगे बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • उत्तर प्रदेश के लोग अब अपनी सारी जमीन का काम जैसे रिकॉर्ड आदि कोई भी काम ऑनलाइन देख सकते हैं। आप कहीं भी जमीन खरीदते हैं तो आप अब उस जमीन से संबंधित सारी जानकारी ऑनलाइन के माध्यम से देख सकते हैं जिससे कि आप ठगी का शिकार होने से बच जाएंगे। इससे चोरों के काम में भी कमी आएगी। 

विरासत अभियान- उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अभियान शुरू किया है, जिसका नाम है विरासत अभियान। अगर आपकी खुद की जमीन है या खेत है या कोई अवैध रूप से कब्जा कर रखा है या कुछ ऐसा होता है कि आप की जमीन है। आपके पिता जी एक्सपायर हो गए पर आपको उसका मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा है। तो इसी के तहत यूपी सरकार में विरासत अभियान शुरू किया है। जिसके तहत जमीन हो, खेत हो अथवा  आपकी किसी प्रकार की जमीन हो उसका विवाद हो। आपके घर या गांव में उनका निवारण कर सके इसके लिए विरासत अभियान चलाया गया है।

यूपी सरकार ने जमीन या खेतों से जुड़ी लड़ाई को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर विरासत अभियान शुरू किया गया है। विरासत अभियान का मुख्य कार्य जमीन या खेतों की आपसी लड़ाई को जड़ से खत्म करना है। उत्तर प्रदेश में बिना किसी विवाद के उत्तराधिकारी को खतौनी में दर्ज करने के लिए सभी ग्राम सभाओं में विरासत अभियान की शुरुआत की गई है। जमीन के मालिक को अपना अधिकार मिले। अपना उत्तराधिकारी के संकल्प के साथ यह अभियान 2 महीने तक चलेगा। 

उत्तर प्रदेश विरासत अभियान कब तक चलेगा

UP विरासत अभियान को ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी तरीके से कर सकते हैं। विरासत अभियान को ऑनलाइन करने के लिए उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आप कर सकते हैं। कई लोग ऑफलाइन करना चाहते हैं तो वह तहसील या लेखपाल का सहारा ले सकते हैं।उत्तर प्रदेश विरासत अभियान की शुरुआत 15 दिसंबर से की।  इस विरासत अभियान से सरकारी कर्मचारियों की मनमानी पर भी रोक लगेगी। जमीनों की लड़ाइयां पर भी काफी हद तक रोक लग सकेगी।  यदि आपकी जमीन से लेकर कोई भी लड़ाई है या विवाद है तो आप विरासत अभियान में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 

उत्तर प्रदेश विरासत अभियान ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

विरासत अभियान के चलते आप शिकायत दर्ज करने के लिए ऑफलाइन अथवा ऑनलाइन दोनों ही तरीकों से कर सकते हैं। जैसे कि आप ऑफलाइन मामले दर्ज करना चाहते हैं तो आप अपने तहसील पर जा सकते हैं और सारी तहसीलों में एक काउंटर भी खोले गए हैं। जिससे आप आसानी से ऑफलाइन तरीके से मामले दर्ज कर सकते हैं। आप लेखपाल से मिलकर भी विरासत अभियान में मामले दर्ज करा सकते हैं।

यदि आप ऑनलाइन तरीके से विरासत अभियान में मामले दर्ज करना चाहते हैं। तो आप राजस्व परिषद की वेबसाइट पर जाकर अपना मामला बड़ी ही आसानी से सर्च कर सकते हैं। लेखपाल द्वारा कार्यक्रम बनाकर सर्वे कर लोगों से उनका आवेदन पत्र प्राप्त कर उन्हें ऑनलाइन भरा जाएगा और आप अपनी नजदीकी जन सेवा केंद्र में जाकर भी विरासत अभियान में ऑनलाइन मामले दर्ज कर सकते हैं। 

यूपी विरासत अभियान 16 जनवरी से 31 जनवरी तक होगा-

  • बैठक के लिए डीएम प्रचार करेंगे।
  • अपनी ऑनलाइन संख्या में विवरण अंकित करते हुए।
  • ग्राम राजस्व में खुली बैठक का आयोजन होगा।
  • बैठक में आवेदक की ओर से भरे गए आवेदन और लेखपाल को दी गई जांच संख्या का विवरण सार्वजनिक रूप से पढ़ेंगे। 

Uttar Pradesh विरासत अभियान 1 फरवरी से 15 फरवरी तक होगा- 

  • यह निश्चय किया जाएगा कि किसी भी उत्तराधिकारी को बिना किसी विवाद के प्रकरण दर्ज बाकी होना नहीं रह जाएगा।
  • डीएम, एडीएम, एसडीएम दूसरे जिले के बड़े अधिकारियों की ओर से सभी उत्तराधिकारी के प्रकरणों को पूरा किया जाएगा। 

उत्तर प्रदेश विरासत अभियान टोल फ्री नंबर

उत्तर प्रदेश सरकार ने विरासत अभियान के चलते एक सरकारी नंबर 0522-2620477  चलाया है। आप इस नंबर की मदद से यदि आपको कैसी भी कोई भी समस्या का सामना करना पड़े। तो आप इस नंबर की मदद ले सकते हैं। आप उत्तर प्रदेश सीएम हेल्पलाइन नंबर 106 की भी मदद ले सकते हैं। इस अभियान को ग्रामीणों तक पहुंचाया जाएगा, जिसके लिए एक ईमेल आईडी abhiyanvarasat@gmail.com भी चलाई गई है। आप अपनी शिकायत या किसी प्रकार की समस्या लिखकर भी इस ईमेल आईडी पर भेज सकते हैं।

शत्रु संपत्ति क्या है

हाल ही में केंद्र सरकार ने राज्यों को कुछ शत्रु संपत्ति के उपयोग की अनुमति दे दी है। शत्रु संपत्ति वह संपत्ति है जिससे 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय लोग छोड़कर पाकिस्तान और 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद छोड़कर चले गए थे। गृह मंत्रालय द्वारा अध्यादेश के अनुसार राज्य सरकारों को शत्रु संपत्ति के सार्वजनिक इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए शत्रु संपत्ति आदेश 2018 के दिशानिर्देश में संशोधन किया गया है। 

  • शत्रु संपत्तियों में पाकिस्तान की नागरिकता लेने वाले व्यक्तियों की 9280 संपत्तियां और चीन जाने वाले लोग की 126 संपत्तियां शामिल है।  पाकिस्तान जाने वाले लोगों की संपत्तियों में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 4991 संपत्ति है।  इसके बाद 2735 शत्रु संपत्ति पश्चिमी बंगाल और 487 संपत्ति दिल्ली में है जबकि चीन की नागरिकता लेने वाले लोग द्वारा छोड़ी गई शत्रु संपत्ति सबसे ज्यादा मेघालय में 57 पश्चिमी बंगाल में 29 आसाम में 7 है।
  • 2018 में राज्यसभा को गृहमंत्री ने बताया था कि भारत देश में लगभग एक लाख करोड़ रुपए मूल्य की शत्रु संपत्तियां है।  3 हजार करोड़ रुपए के शत्रु शेयर के मूल्य निर्धारण हेतु केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था।  शत्रु संपत्ति कानून 1968 में बताया गया था जिसके जरिए शत्रु संपत्तियों का नियमन होता है।  2017 में इस कानून में संशोधन कर पाकिस्तान और चीन गए व्यक्तियों के संपत्तियों प्राधिकार खत्म कर दिया गए थे।
  • 1947 में देश के बंटवारे के बाद चीन और पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान या उसके बाद शत्रु राष्ट्र में निर्वासित नागरिकों और कंपनियों की संपत्ति शत्रु संपत्ति में शामिल है।  ऐसी संपत्तियों की देखरेख के लिए सरकार एक कस्टोडियन की नियुक्त करती है।  भारत सरकार ने 1968 में शत्रु संपत्ति अधिनियम लागू किया था जिसके तहत शत्रु संपत्ति को कस्टोडियन मे रखने की सुविधा प्रधान की गई।  केंद्र सरकार ने इसके लिए कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी विभाग का गठन किया है, जिससे शत्रु संपत्तियों को अधिग्रहित करने का अधिकार है।  दो देशों में युद्ध होने पर दुश्मन देश के नागरिकों की संपत्ति सरकार कब्जे में कर लेती है ताकि दुश्मन लड़ाई के दौरान उसका फायदा नहीं उठा सके।  पहले और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और ब्रिटेन ने जर्मनी के नागरिको की जायदाद को इसी आधार पर अपने नियंत्रण में ले लिया था।  इसके तहत जमीन, मकान, सोना, गहने, कंपनियों के शेयर और दुश्मन देश के नागरिकों कि किसी भी दूसरी संपत्ति को अपने अधिकार में ले लिया जा सकता है।
  • भारत ने अब तक 9500 शत्रु संपत्तियों की पहचान की है।  इनमें से ज्यादातर पाकिस्तान के नागरिकों की है इनकी कीमत 1,04,339 करोड़ रुपए से अधिक है।  शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत शत्रु देश के नागरिकों को इन संपत्तियों के रख रखाव के लिए कुछ अधिकार भी दिए गए हैं।  पर अस्पष्ट है, काफी उलझन है और कई मामले अदालत में लंबित है।  कोर्ट ने साल 2005 तब कुछ मामले का निपटारा कर दिया।  इनमें अपने फैसले में कहां की शत्रु संपत्ति क रख रखाव करने वाले कस्टोडियन, की तरह काम करता है लेकिन शत्रु देश के पास उसका मालिकाना हक बरकरार रहता है।  सरकार ने 2016 में एक अध्यादेश के जरिए कस्टोडियन के अधिकार में इजाफा कर दिया।  तुरंत बाद में वह अध्यादेश समय के साथ समाप्त हो गया।  साल 2016 में नए विधायक का प्रावधान किया गया।
  • इस विधायक के द्वारा शत्रु संपत्ति के विक्रय को गैर कानूनी घोषित किया गया तथा भारतीय नागरिक विरासत में शत्रु संपत्ति दूसरे को हस्तांतरित नहीं कर सकते।  दीवानी अदालतों को कई मामलों में शत्रु संपत्ति से जुड़े मुकदमे पर सुनवाई का अधिकार नहीं होगा।  यदि किसी भारतीय नागरिक ने कई शत्रु संपत्ति खरीदी है या उसके विकास की है तो कानूनी तौर पर वापस लिया जा सकता है।
  • संसद द्वारा शत्रु संपत्ति कानून 2017 को मंजूरी दी गई थी, जिसमें युद्ध के बाद पाकिस्तान और चीन पलायन कर गए लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्ति और उत्तराधिकार के दावे को रोकने के प्रावधान किए गए हैं।  विधायक के मुताबिक, अब किसी भी शत्रु संपत्ति के मामले में केंद्र सरकार या कस्टोडियन द्वारा की गई किसी कार्रवाई के संबंध में किसी वाद या कारवाही पर विचार नहीं किया जाएगा।  शत्रु संपत्ति के मालिक का कोई उत्तराधिकारी भी यदि भारत लौटता है तो उसका इस संपत्ति पर कोई दावा नहीं होगा।  एक बार कस्टोडियन के अधिकार में जाने के बाद शत्रु संपत्ति पर उत्तराधिकारी का कोई अधिकार नहीं होगा।  शत्रु के वारिस के भारतीय होने या शत्रु अपनी नागरिकता बदल कर किसी और देश का नागरिक बन जाए, ऐसी स्थिति में भी शत्रु संपत्ति कस्टर्ड यम के पास ही रहेगी। 

भारत में शत्रु संपत्ति

  • गृह मंत्रालय ने लोकसभा के अनुसार दी गई एक जानकारी में 2 जनवरी 2018 तक भारत में 9,280 शत्रु संपत्तियां थी जिसमें से 126 चीनी नागरिकों की थी और पाकिस्तानी नागरिकों की थी। इन संपत्तियों के अनुसार सरकार ने एक अनुमान लगाया, इन संपत्तियों की कीमत 1 लाख करोड़ रुपए है।
  • गृह मंत्रालय कानूनी मामले के विभाग, आर्थिक मामले के विभाग, सर्वजनिक उद्यम विभाग के मामले के मंत्रालय के प्रतिनिधि तथा और भी लोगों के साथ अंतर मंत्रालय के लोग इस समिति का हिस्सा होंगे।
  • चीनी नागरिकों द्वारा छोड़ी गई 126 संपत्तियों में पश्चिम बंगाल (29) और सर्वाधिक मेघालय (57) स्थित है।
  • पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा छोड़ी गई 9,280 संपत्तियों में दिल्ली में 487 तथा पश्चिम बंगाल में 2,735 इसके बाद उत्तर प्रदेश में 4,991 है। 
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